आदरणीय चिदंबरम जी ,
आपका भोजपुरी भाषा के प्रति असाधरण प्रेम के बारे में जानकर अत्यंत ख़ुशी हुई .......
परन्तु एक सच्चा भारतीय होने के नाते कुछ सवालो का जवाब जानना चाहता हु .......
1) हमारे देश कि राष्ट्र भाषा क्या है ? क्या हमारे देश की कोई राष्ट्र भाषा नहीं होनी चाहिए ?
2) भोजपुरी के किस रूप को मान्यता देने के बारे में सोच रहे है ? ठेठ ,बनारसी ,जौनपुरी ,गोरखपुर की ,गोंडा की या किसी और की ??
3) क्या भोजपुरी के किसी भी एक रूप को मान्यता देना इस क्षेत्र की एकता को छिन्न -भिन्न करने के बराबर नहीं होगा??
4) क्या भोजपुरी को 8वी अनुसूची में शामिल कर देने भर से इस क्षेत्र के लोगो के साथ न्याय हो जायेगा ??
5) इतिहास क्या कहता है ? इस क्षेत्र के लोगो का सर्वश्रेष्ठ योगदान किस भाषा में रहा है ?? भारत की गरिमामयी भाषा हिंदी को इस बुलंदी तक पहुचाने में किसका योगदान है ? क्या इन प्रश्नों पर विचार कर लिया गया है ?
6) जहा तक मै जनता हु ,हमारी अपनी भाषा हिंदी जो अभी भी एक आरजू लिए आपके द्वार पे खड़ी है राष्ट्र भाषा बनने की अभिलाषा लिए ,हि इस क्षेत्र की सर्वग्राह्य भाषा है .साथ ही इस भाषा को ये उचाई देने वाले लोग ज्यादातर इसी क्षेत्र से है .हिंदी भाषा के विकास कि संकल्पना के साथ सृजन में भी इसी क्षेत्र के लोगो का योगदान है। याद करिए ,भारतेन्दु हरिश्चंद ,निराला,गुप्त,नीरज,दिनकर .
7) अब तक जो राजनीति क्षेत्रीय भाषाओ के नाम होती रही है उसका परिणाम क्या रहा है? भाषा की नज़र से भारत कितने टुकडो में बँट गया और बटता ही जा रहा है। एक भाषा के लोगो का दुसरे भाषा के लोगो से द्वेष चरम पे है। क्या किसी भाषा को इतना विशिष्ट बनाना ही इस समस्या का कारन नहीं है? ऐसी परिशथिति में एक नयी पहचान इस समस्या को और जटिल नहीं बनाएगी?
8) जिस तरह आप क्षेत्रो की भाषा पे ध्यान दे रहे है क्या कभी राष्ट्र भाषा के बारे में भी सोचेंगे? क्या हमारे देश की बहुत सि समस्यायों की जड़ ,देश के एक सर्वमान्य भाषा की कमी नहीं है? जैसे:आरक्षण के पीछे एक तर्क ये भी है की वो कॉन्वेंट के छात्रो का सामना कैसे कर पाएंगे ? आज जब देश की जरुरत क्षेत्रीय और सामाजिक संतुलन है और जो एक common भाषा कि उपलब्धि से पाया जा सकता है फिर इस अवश्यक कदम को उठाने के बजाये भोजपुरी पे प्रेम निछावर से क्या भोजपुरी भाषी खुश हो जायेंगे? जो अबतक देश को हमेशा नयी दिशा देते आये है उन्हें भ्रमित करने में आप कितना सफल हो पाएंगे?
9) भाषा को आधार बनाकर जिस तरह देश का दक्षिणी हिस्सा आज जलता नजर आता है क्या यही सौगात आप उतर भारत को भी देना चाहते है? ये अलगाववादी विचार आप दक्षिण तक ही सिमित रखे ,हमें भारतीय ही रहने दे।
10) क्या ऐसा कोई रास्ता नहीं की हम सारी क्षेत्रीय भाषाओ का सम्मान करते हुए हिंदी को राष्ट्र भाषा का दर्जा दे सके और इसे common भाषा बना सके जो देश में सामाजिक संतुलन कायम करने के साथ साथ कुछ पुरानी समस्याओ से भी निपटने में सहायक होगी?
जवाब के इंतजार में { भारतीय }