शुक्रवार, 25 जनवरी 2013


हमारे देश में कच्चे तेल के बाद दूसरा सबसे बड़ा आयात सोने का होता है.
देश की जनसँख्या अरब २० करोड़ है.
अगर हम औसतन ग्राम सोना प्रति व्यक्ति मन ले तो ग्राम सोने(गहने ) की कीमत लगभग १५००० रुपये होंगे.
इस तरह देश का लगभग १२०००००००००X१५०००=१८००००००००००००  रुपये यु ही अचल सम्पति बना बैठा है.जिसमे ९० % सिर्फ घर में कई सालो तक पड़े रहते है उनका दिखावे के अलावा और कोई उपयोग नहीं होता.
अगर इसे विदेशी मुद्रा भंडार मन ले तो ये लगभग  ३२७२७२७२७२७२. यु.एस.डॉलर होगा.
आज हर तरफ सब्सिडी में कटौती की बाते होती है कोई क्यों नहीं इस अचल सम्पति को चल सम्पति  बनाने की बात करता है?
जबकि अगर चाहे तो हम बैंक और ग्राहक दोनों के फायदे की निति बना सकते है.
जिसके बाद FDI की जरुरत पड़ेगी सब्सिडी घटाने की महंगाई दर भी निचे जाएगी.
बैंक चाहे तो शोर्ट टर्म और लॉन्ग टर्म सोने को जमा खाते में रखने और निकलने की सुविधा ग्राहक को दे सकते है.जिससे ग्राहक का सोना भी सुरक्षित रहेगा और रिटर्न भी मिलेगा.
बैंक के पास भी पैसे की कमी का सामना नहीं करना पड़ेगा. रिजर्व बैंक जो समय समय पर SLR में परिवर्तन करता है उसके बैंक पे पड़ने वाले असर में कमी आयेगी.Basel  III मानक को पूरा karane के लिए अलग  से सहायता की जरुरत नहीं पड़ेगी.
और देश की अर्थ व्यवस्था को पंख लग जायेंगे.
लेकिन हम तो अपनी नीतिगत अपंगता को जनता पे डालने में जुटे है और जनता इसे बर्दास्त करने में.

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